बकोध्यानम्
‘बकोध्यानम्’ चिराग़ जैन का व्यंग्य-संग्रह है, जो फिलहाल प्रकाशनाधीन है। इस पुस्तक में प्रवृत्तियों पर कटाक्ष करते हुए उन लेखों को सहेजा गया है जिनका मूल उद्देश्य अपने समाज को बेहतर बनाना है। इस पुस्तक में विविध विषयों पर लिखे गए व्यंग्य-लेखों का संग्रह है।
अनुक्रम
विवेक निषेध
हमारा समाज पर्दे का दास हो गया है। मीडिया हमारे दृष्टिकोण तय करता है और हम भेड़ों की तरह स्वयं को बुद्धिमान मानकर उस दृष्टिकोण का अनुसरण करने लगते हैं। ‘दंगल’ फिल्म में गीता-बबीता को ज़बरदस्ती उनकी मर्ज़ी के बिना उनके पिता पहलवानी सिखाते हैं तो हम उनके पिता को महान सिद्ध कर देते हैं। क्योंकि कहानी के...
महापुरुषों की मुश्किल
महापुरुषों के लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा है। यदि उनके वश में होता तो फेसबुक से अपनी डेट ऑफ बर्थ और डेट ऑफ डेथ ग़ायब कर देते। न रहता बाँस, न बजती बाँसुरी। पिछली 30 जनवरी को गांधी पूरे दिन सहमे रहे। क्योंकि सत्तर बरस बाद भी उनके देशवासी इस बात पर सहमत नहीं हो पाए हैं कि गांधी को आदर देना चाहिए या...
राजनीति और निष्ठा
जो केजरीवाल कांग्रेस को पानी पी पी कर कोसते थे वे ही दिल्ली में कांग्रेस से गठबंधन के लिए रिरियाते रहे। ताकि किसी भी तरह से सत्ता पाई जा सके। जो भाजपा महबूबा मुफ्ती को गद्दार कहती रही उसी ने सत्ता के लिए महबूबा मुफ्ती से गठबंधन करके सरकार बनाई। जिन नीतीश कुमार ने मोदी के प्रति घृणा के कारण बाढ़...
सम्मानित भारत का ड्राफ्ट
किसी भी देश की समृद्धि संसाधनों के समुचित वितरण पर निर्भर करती है। भारत में संसाधनों की बहुतायत के बाद भी ग़रीबी, अव्यवस्था, अपराध, भुखमरी, बेघरी, बेरोज़गारी, अराजकता और रिश्वतखोरी जैसी समस्याएं कम नहीं हो पा रही हैं। सरकारी योजनाएं केवल कोरा प्रचार बनकर रह जाती हैं और जनता की स्थिति जस की तस रहती...
गाड़ी वाले गाड़ी धीरे हाँक रे…
बुलेट ट्रेन और अंतरिक्ष यान की चर्चाओं के बीच आज कुछ वास्तविक यातायात साधनों की स्थिति ध्यान आ रही है। भारत में एक अदद रेल विभाग है। सड़ांध मारते स्टेशन और देर से चलने के लिए मशहूर रेलगाड़ियाँ इस विभाग की शान हैं। आज़ादी के सात दशक बाद भी भारतीय रेल ने लेटलतीफी की अपनी गौरवमयी परंपरा को बरक़रार रखा...
मज़ाकिया भारत
हम भारत के लोग बहुत मज़ाकिया हैं, इसलिए हमने भारतीय तंत्र और भारतीय लोकतंत्र दोनों का मज़ाक़ बना दिया है। हम भारत के लोग संविधान की शपथ लेकर झूठ बोलने में दक्ष हो चुके हैं। हमने इतना विश्वास कमाया है कि जब हम झूठ बोलते हैं तो सब बिना सुने ही समझ जाते हैं कि हम झूठ ही बोल रहे हैं। सब यह भी समझ चुके...
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का आम चुनाव सामने है। यह संभवतः पहला ऐसा आम चुनाव है जिसमें मीडिया से अधिक प्रभाव सोशल मीडिया का है। अब से पहले राजनीति में एक जुमला चलता था कि जनता की याद्दाश्त बहुत कमज़ोर है। लेकिन अब राजनीति यह समझ गई है कि मोबाइल की याद्दाश्त कमज़ोर नहीं होती। इसी कारण राजनीति ने न...
छलायण
अहमपुरी के उपद्रव से व्यथित होकर दशरथ कोपभवन में बैठ गए। मन्थरा और आर्यसुमन्त ने बहुत समझाया किन्तु दशरथ न माने। कोई उपाय न सूझने पर कैकेयी ने उन्हें वचन दिया कि अहमपुरी के राजकुँवर को सिंहासन से उतार दिया जाएगा। दशरथ, कैकेयी तथा मंथरा पुष्पक विमान में बैठ अहमपुरी की ओर उड़ चले। मानवता के पक्षधर...
सामान्यीकरण
हम घटनाओं का सामान्यीकरण करने के अभ्यस्त हैं। किसी एक घटना से पूरे व्यक्ति का, किसी एक व्यक्ति से पूरे समुदाय का, किसी एक समुदाय से पूर समाज का और किसी एक समाज से पूरे राष्ट्र का चरित्र आकलन करना हमारा अभ्यास है। इस अभ्यास में हम तर्कहीन हो जाते हैं। प्रत्येक बहस में हम अपनी बुद्धिमत्ता प्रदर्शित...
मेरा धर्म
कृष्ण : युद्ध लड़ो पार्थ! अर्जुन : युद्ध किसी के हित में नहीं है माधव। कृष्ण : किन्तु युद्ध क्षत्रिय का धर्म है कौन्तेय। अर्जुन : फिर आप शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर क्यों गए थे मधुसूदन? कृष्ण : क्योंकि वह मेरा धर्म था कौन्तेय। ✍️ चिराग़...