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बकोध्यानम्

‘बकोध्यानम्’ चिराग़ जैन का व्यंग्य-संग्रह है, जो फिलहाल प्रकाशनाधीन है। इस पुस्तक में प्रवृत्तियों पर कटाक्ष करते हुए उन लेखों को सहेजा गया है जिनका मूल उद्देश्य अपने समाज को बेहतर बनाना है। इस पुस्तक में विविध विषयों पर लिखे गए व्यंग्य-लेखों का संग्रह है।

अनुक्रम

चोरी चालू आहे…

सोशल मीडिया पर रचना का सम्मान किया जाता है, रचनाकार का नहीं। ठीक इसी प्रकार जैसे सरकार ग़रीबी के हित की चिंता करती है, ग़रीब के हित की नहीं। लगभग प्रत्येक सोशल नेटवर्किंग साइट ने किसी की रचना बहुत पसंद आने पर उसे ‘शेयर’ करने का विकल्प बनाया है, लेकिन चूँकि बनी हुई लकीरों पर चलनेवाले लोग इतिहास में...

चुनाव तंत्र

भारत एक चुनाव प्रधान देश है। यहाँ जनता छँटे हुए लोगों में से कुछ लोगों को चुनती है ताकि ये चुने हुए लोग चुन-चुनकर जनता को चूना लगा सकें। जो चुन लिया जाता है वह जनता की अनदेखी करता रहता है और जो नहीं चुना जाता उसकी अनदेखी जनता करती रहती है। चुनाव हमारी राजनीति का प्रमुख व्यवसाय है। इसलिए यहाँ सब...

वन्स अपॉन ए टाइम

वन्स अपॉन ए टाइम। जम्बूद्वीपे भरतखण्डे एक ऐसा राजा था, जिसे प्रशंसा सुनने का बहुत चाव था। उसने राजा बनते ही अपने महल में से बहादुर सिपाहियों को हटाकर वहाँ सैनिक के कपड़ों में प्रशंसक खड़े कर दिए। प्रशंसा और चाटुकारिता की क्षमता देखते हुए राजतंत्र को पद तथा पदोन्नतियाँ दी गईं। जब कोई नागरिक राजा के...

साहित्य के कुण्ठित प्रेत

मैं एक ऐसे साहित्यकार को जानता हूँ जो हर समय विरोध और प्रतिकार की मुद्रा में ही दृष्टिगोचर होते हैं। वे कहीं भी, कभी भी, किसी भी बात से असहमत हो जाते हैं। यह असहमति उनकी दाढ़ी की तरह घटती-बढ़ती रहती है। वेदव्यास से लेकर तुलसीदास तक और राजेन्द्र यादव से दुष्यंत कुमार तक कोई साहित्यिक तीसमारखां उनकी...

क्यों न करें राजनीति?

जब भी कोई घटना घटती है तो हर कोई ऐरा-ग़ैरा मुँह उठाकर राजनेताओं को उपदेश देने लगता है कि इस घटना पर राजनीति न करो। हद्द है, क्यों न करें राजनीति! राजनीति करना उनका काम है। तुम्हारी तरह संवेदना और जनहित जैसी फालतू बातों में उलझना होता तो राजनीति में क्यों आते? हमारा कंसेप्ट बिल्कुल क्लियर है। घटनाएँ...

जग में सभी खोवायो

मीराबाई ने फेसबुक पर लिखा - ‘मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई’। लोगों ने इस पंक्ति को अपने-अपने स्टेटस पर चिपकाया। कुछ दिन बाद राणा ने मीराबाई के खि़लाफ़ एक पोस्ट लिखी। लोगों ने उस पोस्ट को देखते ही मीराबाई को ट्रोल करना शुरू कर दिया। कुछ क्रिएटिव लोगों ने फोटोशॉप करके मीराबाई की आपत्तिजनक फोटुएँ...

भई संतन की भीड़

गोस्वामी तुलसीदास ने रामायण का अवधी में अनुवाद करके रामचरितमानस लिखी। संस्कृत विद्वानों ने ‘कट्टर संस्कृतभाषी’ नामक व्हाट्सएप ग्रुप में मानस को संस्कृत के लिए संकट घोषित करते हुए फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम पर तुलसी विरोध की फौज तैयार कर ली। मानस अनपढ़ों का ग्रन्थ है, तुलसी की जाति का पता नहीं है,...

सरकार का साक्षात्कार

‘हुज़ूर पैदल चलते मजदूरों के लिए सरकारें क्या कर रही हैं?’ ‘सरकारें मजदूरों की सहायता के लिए योजना बना रही हैं।’ ‘लेकिन जब तक योजना बनेगी तब तक मजदूर कई योजन चल चुके होंगे।’ ‘यह सब जनहित में किया जा रहा है। सरकारें जानती हैं कि मजदूरों का स्वस्थ रहना आवश्यक है। स्वस्थ रहने के लिए उचित पोषण की...

दान का उपदेश

हम अजीब किस्म के नकारात्मक लोग हैं। हमें दूसरों पर उंगली उठाने की लत पड़ी हुई है। इस भयावह संकट के समय में भी आज सुबह से लोग अलग-अलग सेलिब्रिटीज़, अलग-अलग उद्योगपतियों और अलग-अलग राजनेताओं के नाम लिखकर लानत भेज रहे हैं कि संकट के समय वे अपनी पूंजी में से दान करके समाजसेवा क्यों नहीं करते? हद्द है...

हँसना बहुत ज़रूरी है

भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में कोरोना, दहशत का सबब बन गया है। अमरीका, चीन और इटली जैसे देशों ने सख्ती के साथ जनता को घरों में बन्द कर दिया है। भारत में भी सरकार को कमोबेश सख्ती बरतनी पड़ रही है। दरअस्ल अनवरत भागती-दौड़ती ज़िन्दगी को टिककर बैठने का अभ्यास ही नहीं रहा है। तेज़ दौड़ती गाड़ी के ड्राइवर को...

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