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बकोध्यानम्

‘बकोध्यानम्’ चिराग़ जैन का व्यंग्य-संग्रह है, जो फिलहाल प्रकाशनाधीन है। इस पुस्तक में प्रवृत्तियों पर कटाक्ष करते हुए उन लेखों को सहेजा गया है जिनका मूल उद्देश्य अपने समाज को बेहतर बनाना है। इस पुस्तक में विविध विषयों पर लिखे गए व्यंग्य-लेखों का संग्रह है।

अनुक्रम

द्वितीयो नास्ति

भारत देशभक्तों का देश है। किसी भी आपदा की स्थिति में हम आपदा के निवारण करने की बजाय अपनी देशभक्ति साबित करने में व्यस्त हो जाते हैं। हमारे पास देशभक्ति की कसौटी पर कसने के लिए राजनीति है और देशभक्ति के रास्ते पर मिटने के लिए सेना। इसलिए हम अपने हिस्से की देशभक्ति निभाना आवश्यक नहीं समझते। हम...

स्मृति-नियंत्रण का वरदान

भारतीय राजनेताओं को स्मृति-नियंत्रण का एक विशेष वरदान प्राप्त है। इसी वरदान के आधार पर वे सत्ता के दुर्ग बना पाते हैं। यह विशेष सुविधा ही उन्हें शर्मिंदा होकर डूब मरने से बचा लेती है अन्यथा हमारा देश राजनेताओं से विहीन हो चुका होता। लालूप्रसाद यादव के साथ गठबंधन करते समय यदि नितीश कुमार को यह याद...

राम का नाम भजो

चैनल के स्टूडियो में बाहर गार्ड तैनात था। उसका काम था अनावश्यक लोगों को स्टूडियो में जाने से रोकना। इसलिए वह प्रत्येक व्यक्ति का परिचय जानकर उसे प्रवेश करने दे रहा था। पहले व्यक्ति ने बताया कि वह एंकर है, उसे मुद्दे पर प्रश्न पूछने हैं। गार्ड ने उसे प्रवेश दे दिया। दूसरे व्यक्ति ने बताया कि मुझे...

दिल्ली भारत की राजधानी है

दिल्ली भारत की राजधानी है। देश के सभी प्रकार के कार्यों को करने के लिए बड़े-बड़े सरकारी दफ्तर इसी शहर में बनाए गए हैं। इस प्रयास में पूरा शहर एक दफ़्तर हो गया है और हर नागरिक एक फाइल। घर से दफ़्तर और दफ़्तर से घर के बीच घूमते-घूमते हर नागरिक के व्यक्तित्व पर इतनी खरोंचें पड़ गई हैं कि जब वह ख़ुद को...

दिल्ली की व्यवस्था

वैसे दिल्ली दिलवाले मरीजों की राजधानी मानी जाती थी, लेकिन आजकल प्रदूषण ने इसे फेफड़ेवाले मरीजों की फैक्ट्री बना दिया है। स्मार्टफोन के कैमरे और यूट्यूब से कमाई की ख़बरों ने जिस कौम का सबसे ज़्यादा नुक़सान किया है वह है आशिक़। सफदरजंग मक़बरा, पुराना किला, लोदी गार्डन, कुदसिया पार्क, कालिंदी कुंज, गार्डन...

अटल विश्वास और अटूट विश्वास

हम भारतीय लोग प्रवृत्ति से विश्वासजीवी हैं। विश्वास दो प्रकार का होता है, एक अटल विश्वास और दूसरा अटूट विश्वास। भाषा के बहुत गहरे विश्लेषण के हाथों मजबूर न हों तो इन दोनों का अर्थ एक ही है किन्तु फिर भी विश्वास दो प्रकार का होता है ऐसा हमारा विश्वास है। जब हम किसी पर अटूट विश्वास करते हैं तो उसे...

उचक्कों की भाभी

छोरे उचक्कों से दिन-रात घर की रखवाली करते थे। घर का बूढ़ा उचक्कों के मुहल्ले से होकर गुज़रता था। उचक्कों की भाभी बूढ़े को देखकर स्माइल पास करती थी। स्त्री की मुस्कुराहट से बूढ़े को थोड़ी-थोड़ी गुदगुदी होती लेकिन उचक्कों की हरकतें ध्यान आते ही वह तेज़ी से आगे बढ़ जाता। गर्मी का मौसम आया तो बूढ़ा कभी-कभी...

कबीलाई समाज की ओर

हम एक सुदृढ़ लोकतंत्र से वापस कबीलाई समाज व्यवस्था की ओर अग्रसर हैं। और सही कहें तो अग्रसर भी नहीं ‘उग्रसर’ हैं। हर कबीले में लड़ाकों की और अपराधियों की प्रचुर मात्रा उपलब्ध है। लेकिन हर क़बीले के अपने नियम हैं। हिन्दू क़बीले का कोई बलात्कारी यदि मुस्लिम क़बीले की किसी लड़की को दबोच लेता है, तो यह गुनाह...

व्हाट्सएप्प और फेसबुक

बचपन से देखते आए हैं। घर के एक कोने में दो झाडुएँ रखी होती थीं। एक फूलबुहारी और एक सींक वाली झाडू। कमरों के भीतर का फ़र्श बुहारना होता था तो फूलबुहारी प्रयोग की जाती थी। और आंगन या चौबारा झाड़ना होता था तो सींकों वाली झाड़ू काम आती थी। यही सिद्धांत सीख लें तो सोशल मीडिया का प्रयोग करना आ जाए। घर के...

मुद्दा मैनेजमेंट

कई बार ऐसा लगता है कि इस देश की स्थिति किसी कम्प्यूटर जैसी है। आप जो फाइल खोलते हो, पूरी स्क्रीन पर वही दिखाई देती है। फिर आप उसे क्लोज़ या मिनिमाइज़ करके दूसरी फाइल खोल लेते हो, तो पिछली फाइल की छाया तक नहीं बचती स्क्रीन पर। इस कम्प्यूटर का ऑपरेटर दलित आंदोलन की फाइल खोल के बैठ गया तो पूरा देश फूंक...

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